Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.308.6-7: पच्चीसवाँ तत्त्वरूपी महान् आत्मा अव्यक्त प्रकृति को जानता है, इसलिए उसे 'बुद्धिमान' कहा जाता है; परंतु वह छब्बीसवाँ तत्त्वरूप, शुद्ध सनातन शुद्ध बुद्ध, अथाह सनातन परमेश्वर को भी नहीं जानता; परंतु वह सनातन परमेश्वर पच्चीसवाँ तत्त्वरूप आत्मा और चौबीसवीं प्रकृति को भी भलीभाँति जानता है॥6-7॥ | mahabharat अध्याय 12.308: क्षर-अक्षर और परमात्म-तत्त्वका वर्णन, जीवके नानात्व और एकत्वका दृष्टान्त, उपदेशके अधिकारी और अनधिकारी तथा इस ज्ञानकी परम्पराको बताते हुए वसिष्ठ-करालजनक-संवादका उपसंहार । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अव्यक्तबोधनाच्चापि बुध्यमानं वदन्त्युत।
पञ्चविंशं महात्मानं न चासावपि बुध्यते॥ ६॥
षड्विंशं विमलं बुद्धमप्रमेयं सनातनम्।
स तु तं पञ्चविंशं च चतुर्विंशं च बुध्यते॥ ७॥
अनुवाद
पच्चीसवाँ तत्त्वरूपी महान् आत्मा अव्यक्त प्रकृति को जानता है, इसलिए उसे 'बुद्धिमान' कहा जाता है; परंतु वह छब्बीसवाँ तत्त्वरूप, शुद्ध सनातन शुद्ध बुद्ध, अथाह सनातन परमेश्वर को भी नहीं जानता; परंतु वह सनातन परमेश्वर पच्चीसवाँ तत्त्वरूप आत्मा और चौबीसवीं प्रकृति को भी भलीभाँति जानता है॥6-7॥
The great soul, the twenty-fifth element, knows the unmanifested nature, hence it is called 'intelligent'; But he also does not know the twenty-sixth elemental form, the pure eternal pure Buddha, the immeasurable eternal God; But that eternal God knows the twenty-fifth elemental form of soul and the twenty-fourth nature also very well. 6-7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥