Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.308.48: इस तत्त्व को न जानने के कारण ही मूर्ख मनुष्य बार-बार इस संसार में आता है और हजारों योनियों में जन्म-मरण का दुःख भोगता है ॥ 48॥ | mahabharat अध्याय 12.308: क्षर-अक्षर और परमात्म-तत्त्वका वर्णन, जीवके नानात्व और एकत्वका दृष्टान्त, उपदेशके अधिकारी और अनधिकारी तथा इस ज्ञानकी परम्पराको बताते हुए वसिष्ठ-करालजनक-संवादका उपसंहार । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस तत्त्व को न जानने के कारण ही मूर्ख मनुष्य बार-बार इस संसार में आता है और हजारों योनियों में जन्म-मरण का दुःख भोगता है ॥ 48॥
Due to not knowing this principle, the foolish man comes to this world again and again and experiences the pain of birth and death in thousands of species. ॥ 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥