Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.308.47: पृथ्वीनाथ! जिसने अक्षरों और अक्षरों का सार समझ लिया है, उसे किसी प्रकार का भय नहीं रहता। जो इसे नहीं जानता, उसे भय रहता है।   |   mahabharat अध्याय 12.308: क्षर-अक्षर और परमात्म-तत्त्वका वर्णन, जीवके नानात्व और एकत्वका दृष्टान्त, उपदेशके अधिकारी और अनधिकारी तथा इस ज्ञानकी परम्पराको बताते हुए वसिष्ठ-करालजनक-संवादका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 308: क्षर-अक्षर और परमात्म-तत्त्वका वर्णन, जीवके नानात्व और एकत्वका दृष्टान्त, उपदेशके अधिकारी और अनधिकारी तथा इस ज्ञानकी परम्पराको बताते हुए वसिष्ठ-करालजनक-संवादका उपसंहार  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  12.308.47 
येन क्षराक्षरे वित्ते भयं तस्य न विद्यते।
विद्यते तु भयं तस्य यो नैतद् वेत्ति पार्थिव॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वीनाथ! जिसने अक्षरों और अक्षरों का सार समझ लिया है, उसे किसी प्रकार का भय नहीं रहता। जो इसे नहीं जानता, उसे भय रहता है।
 
Prithvinath! He who has understood the essence of letters and aksharas, has no fear of any kind. He who does not know this, has fear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)