Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.308.45-46: महात्मा वसिष्ठ मुनि ने ब्रह्माजी से यह ज्ञान प्राप्त किया था। महर्षि वसिष्ठ से यह नारदजी को प्राप्त हुआ और नारदजी से मुझे सनातन ब्रह्म का उपदेश प्राप्त हुआ है। हे कौरवराज! यह ज्ञान परमपद है। अब इसे सुनकर तुम्हें शोक त्याग देना चाहिए ॥45-46॥ | mahabharat अध्याय 12.308: क्षर-अक्षर और परमात्म-तत्त्वका वर्णन, जीवके नानात्व और एकत्वका दृष्टान्त, उपदेशके अधिकारी और अनधिकारी तथा इस ज्ञानकी परम्पराको बताते हुए वसिष्ठ-करालजनक-संवादका उपसंहार । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महात्मा वसिष्ठ मुनि ने ब्रह्माजी से यह ज्ञान प्राप्त किया था। महर्षि वसिष्ठ से यह नारदजी को प्राप्त हुआ और नारदजी से मुझे सनातन ब्रह्म का उपदेश प्राप्त हुआ है। हे कौरवराज! यह ज्ञान परमपद है। अब इसे सुनकर तुम्हें शोक त्याग देना चाहिए ॥45-46॥
Mahatma Vasishtha Muni had received this knowledge from Brahmaji. From the great sage Vasishtha it was attained by Naradaji and from Naradaji I have received the teachings of the eternal Brahma. O King of Kauravas! This knowledge is the highest state. Now after listening to this you should give up your grief. ॥45-46॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥