Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.308.42: भीष्मजी बोले- महाराज! महर्षि वसिष्ठ के कथनानुसार मैंने आपसे परब्रह्म का वह स्वरूप कहा है, जिसे प्राप्त करके जीवात्मा इस संसार में लौटकर नहीं आता।   |   mahabharat अध्याय 12.308: क्षर-अक्षर और परमात्म-तत्त्वका वर्णन, जीवके नानात्व और एकत्वका दृष्टान्त, उपदेशके अधिकारी और अनधिकारी तथा इस ज्ञानकी परम्पराको बताते हुए वसिष्ठ-करालजनक-संवादका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 308: क्षर-अक्षर और परमात्म-तत्त्वका वर्णन, जीवके नानात्व और एकत्वका दृष्टान्त, उपदेशके अधिकारी और अनधिकारी तथा इस ज्ञानकी परम्पराको बताते हुए वसिष्ठ-करालजनक-संवादका उपसंहार  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.308.42 
भीष्म उवाच
एतदुक्तं परं ब्रह्म यस्मान्नावर्तते पुन:।
पञ्चविंशो महाराज परमर्षिनिदर्शनात्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले- महाराज! महर्षि वसिष्ठ के कथनानुसार मैंने आपसे परब्रह्म का वह स्वरूप कहा है, जिसे प्राप्त करके जीवात्मा इस संसार में लौटकर नहीं आता।
 
Bhishmaji said- Maharaj! As told by Maharishi Vasishtha, I have told you the form of the Supreme Brahman, after attaining which the soul does not return to this world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)