Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.308.41: नरेन्द्र! जिस प्रकार तुमने मुझसे पूछा है और जिस प्रकार मैंने आज तुम्हें यह ज्ञान सुनाया है, उसी प्रकार मैंने ब्रह्माजी से भी पूछा है और उनके मुख से यह महान ज्ञान प्राप्त किया है। यह मोक्ष ज्ञानियों का परम आश्रय है।॥41॥ | mahabharat अध्याय 12.308: क्षर-अक्षर और परमात्म-तत्त्वका वर्णन, जीवके नानात्व और एकत्वका दृष्टान्त, उपदेशके अधिकारी और अनधिकारी तथा इस ज्ञानकी परम्पराको बताते हुए वसिष्ठ-करालजनक-संवादका उपसंहार । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नरेन्द्र! जिस प्रकार तुमने मुझसे पूछा है और जिस प्रकार मैंने आज तुम्हें यह ज्ञान सुनाया है, उसी प्रकार मैंने ब्रह्माजी से भी पूछा है और उनके मुख से यह महान ज्ञान प्राप्त किया है। यह मोक्ष ज्ञानियों का परम आश्रय है।॥41॥
Narendra! Just as you have asked me and just as I have preached this knowledge to you today, similarly I have also asked Brahmaji and received this great knowledge from his mouth. This salvation is the ultimate refuge of the knowledgeable. ॥ 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥