Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.308.3: जनेश्वर! जीवात्मा इस संसार में सदा क्रीड़ा करने के लिए ही विकारों को प्राप्त होता है। वह अव्यक्त प्रकृति को जानता है, इसीलिए ऋषिगण उसे 'बुद्धिमान' कहते हैं॥3॥ | mahabharat अध्याय 12.308: क्षर-अक्षर और परमात्म-तत्त्वका वर्णन, जीवके नानात्व और एकत्वका दृष्टान्त, उपदेशके अधिकारी और अनधिकारी तथा इस ज्ञानकी परम्पराको बताते हुए वसिष्ठ-करालजनक-संवादका उपसंहार । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जनेश्वर! जीवात्मा इस संसार में सदा क्रीड़ा करने के लिए ही विकारों को प्राप्त होता है। वह अव्यक्त प्रकृति को जानता है, इसीलिए ऋषिगण उसे 'बुद्धिमान' कहते हैं॥3॥
Janeshwar! The living soul attains vices only to play in this world forever. He knows the unmanifested nature, that is why the sages call him 'intelligent'. 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥