Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.308.29: जिस व्यक्ति का आचरण और विचार शुद्ध हैं, उसके संपर्क में आने पर वह भी शुद्ध कर्म और पवित्र हो जाता है। जिस व्यक्ति का हृदय शुद्ध है, उसके संपर्क में आने पर वह भी शुद्ध हृदय और अनंत तेज वाला हो जाता है ॥29॥ | mahabharat अध्याय 12.308: क्षर-अक्षर और परमात्म-तत्त्वका वर्णन, जीवके नानात्व और एकत्वका दृष्टान्त, उपदेशके अधिकारी और अनधिकारी तथा इस ज्ञानकी परम्पराको बताते हुए वसिष्ठ-करालजनक-संवादका उपसंहार । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शुचिकर्मा शुचिश्चैव भवत्यमितदीप्तिमान्।
विमलात्मा च भवति समेत्य विमलात्मना॥ २९॥
अनुवाद
जिस व्यक्ति का आचरण और विचार शुद्ध हैं, उसके संपर्क में आने पर वह भी शुद्ध कर्म और पवित्र हो जाता है। जिस व्यक्ति का हृदय शुद्ध है, उसके संपर्क में आने पर वह भी शुद्ध हृदय और अनंत तेज वाला हो जाता है ॥29॥
On meeting a person whose conduct and thoughts are pure, he becomes pure in action and pure. On coming in contact with a person whose heart is pure, he too becomes pure at heart and infinitely radiant. ॥ 29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥