Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.308.18: जब जीवात्मा बुद्धि के द्वारा इस भौतिक जगत् को अपना नहीं मानता अर्थात् इससे सम्बन्ध नहीं जोड़ता, तब वह आत्मा जो प्रतिदिन चेतन परमेश्वर के साथ एकाकार होता है, परमेश्वर के साथ एक हो जाता है ॥18॥ | mahabharat अध्याय 12.308: क्षर-अक्षर और परमात्म-तत्त्वका वर्णन, जीवके नानात्व और एकत्वका दृष्टान्त, उपदेशके अधिकारी और अनधिकारी तथा इस ज्ञानकी परम्पराको बताते हुए वसिष्ठ-करालजनक-संवादका उपसंहार । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब जीवात्मा बुद्धि के द्वारा इस भौतिक जगत् को अपना नहीं मानता अर्थात् इससे सम्बन्ध नहीं जोड़ता, तब वह आत्मा जो प्रतिदिन चेतन परमेश्वर के साथ एकाकार होता है, परमेश्वर के साथ एक हो जाता है ॥18॥
When the living soul does not consider the material world as its own through the intellect, that is, does not establish a relationship with it, then that soul, which is daily united with the conscious God, becomes one with God. 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥