Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.308.15: तत्! यह आत्मा वास्तव में तत्त्वों से अतीत है, इसलिए इसका कोई तद्रूप स्वरूप नहीं है; परंतु ज्ञानी होने के कारण ब्रह्म का ज्ञान होने पर वह शीघ्र ही स्वाभाविक तत्त्वों का त्याग कर देता है और उसमें शुद्ध बुद्ध ब्रह्म के लक्षण सदैव दृष्टिगोचर होते रहते हैं॥15॥ | mahabharat अध्याय 12.308: क्षर-अक्षर और परमात्म-तत्त्वका वर्णन, जीवके नानात्व और एकत्वका दृष्टान्त, उपदेशके अधिकारी और अनधिकारी तथा इस ज्ञानकी परम्पराको बताते हुए वसिष्ठ-करालजनक-संवादका उपसंहार । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न चैष तत्त्ववांस्तात निस्तत्त्वस्त्वेष बुद्धिमान्।
एष मुञ्चति तत्त्वं हि क्षिप्रं बुद्धस्य लक्षणम्॥ १५॥
अनुवाद
तत्! यह आत्मा वास्तव में तत्त्वों से अतीत है, इसलिए इसका कोई तद्रूप स्वरूप नहीं है; परंतु ज्ञानी होने के कारण ब्रह्म का ज्ञान होने पर वह शीघ्र ही स्वाभाविक तत्त्वों का त्याग कर देता है और उसमें शुद्ध बुद्ध ब्रह्म के लक्षण सदैव दृष्टिगोचर होते रहते हैं॥15॥
Tat! This soul is actually beyond the elements, hence there is no corresponding form; But due to being knowledgeable, when the knowledge of Brahman arises, he soon gives up the natural elements and the characteristics of pure Buddha Brahma are always visible in him. 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥