Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.308.14: हे सबका आदर करने वाले राजा! तत्वों का आश्रय लेकर ही जीवात्मा तत्व-रूप प्रतीत होता है। वस्तुतः, तत्वों का द्रष्टा मात्र होने के कारण वह तत्व नहीं है - वह तत्वों से सर्वथा भिन्न है। इस प्रकार ज्ञानी पुरुष आत्मा को (प्रकृति के चौबीस तत्वों सहित) एक तत्व मानकर कुल पच्चीस तत्वों का प्रतिपादन करते हैं। | mahabharat अध्याय 12.308: क्षर-अक्षर और परमात्म-तत्त्वका वर्णन, जीवके नानात्व और एकत्वका दृष्टान्त, उपदेशके अधिकारी और अनधिकारी तथा इस ज्ञानकी परम्पराको बताते हुए वसिष्ठ-करालजनक-संवादका उपसंहार । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्त्वसंश्रयणादेतत् तत्त्ववन्न च मानद।
पञ्चविंशति तत्त्वानि प्रवदन्ति मनीषिण:॥ १४॥
अनुवाद
हे सबका आदर करने वाले राजा! तत्वों का आश्रय लेकर ही जीवात्मा तत्व-रूप प्रतीत होता है। वस्तुतः, तत्वों का द्रष्टा मात्र होने के कारण वह तत्व नहीं है - वह तत्वों से सर्वथा भिन्न है। इस प्रकार ज्ञानी पुरुष आत्मा को (प्रकृति के चौबीस तत्वों सहित) एक तत्व मानकर कुल पच्चीस तत्वों का प्रतिपादन करते हैं।
The king who respects everyone! The living soul appears element-like only by taking shelter of the elements. In fact, because he is merely an observer of the elements, he is not an element – he is completely different from the elements. In this way, the wise men consider the soul as one element (along with the twenty-four elements of nature) and propound a total of twenty-five elements.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥