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mahabharat 12.307.9: ज्ञान को अव्यक्त कहा गया है और परमात्मा को ज्ञेय कहा गया है। इसी प्रकार बुद्धि भी अव्यक्त है और उसका ज्ञाता परमात्मा है। ॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.307: विद्या-अविद्या, अक्षर और क्षर तथा प्रकृति और पुरुषके स्वरूपका एवं विवेकीके उद्‍गारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 307: विद्या-अविद्या, अक्षर और क्षर तथा प्रकृति और पुरुषके स्वरूपका एवं विवेकीके उद्‍गारका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.307.9 
ज्ञानमव्यक्तमित्युक्तं ज्ञेयो वै पञ्चविंशक:।
तथैव ज्ञानमव्यक्तं विज्ञाता पञ्चविंशक:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
ज्ञान को अव्यक्त कहा गया है और परमात्मा को ज्ञेय कहा गया है। इसी प्रकार बुद्धि भी अव्यक्त है और उसका ज्ञाता परमात्मा है। ॥9॥
 
Knowledge is said to be unmanifest and the Supreme Being is said to be the knowable. Similarly, wisdom is unmanifest and its knower is the Supreme Being. ॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)