श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 307: विद्या-अविद्या, अक्षर और क्षर तथा प्रकृति और पुरुषके स्वरूपका एवं विवेकीके उद्‍गारका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.307.7 
विद्या प्रकृतिरव्यक्तं तत्त्वानां परमेश्वरी।
विद्या ज्ञेया नरश्रेष्ठ विधिश्च परम: स्मृत:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
नरश्रेष्ठ! अव्यक्त नाम सहित ईश्वरीय प्रकृति ही समस्त तत्त्वों का ज्ञान है। यह ज्ञान जानने योग्य है। इसे ज्ञान की परम विधि कहते हैं। 7॥
 
Narashrestha! The divine nature with the unexpressed name is the knowledge of all the elements. This knowledge is worth knowing. This is called the ultimate method of knowledge. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)