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mahabharat 12.307.6: नरेश्वर! उन पाँच सूक्ष्म तत्त्वों का ज्ञान ही अहंकार है, इसमें संशय नहीं है और अहंकार का ज्ञान ही बुद्धि माना गया है॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.307: विद्या-अविद्या, अक्षर और क्षर तथा प्रकृति और पुरुषके स्वरूपका एवं विवेकीके उद्‍गारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.307.6 
अहङ्कारस्तु भूतानां पञ्चानां नात्र संशय:।
अहङ्कारस्य च तथा बुद्धिर्विद्या नरेश्वर॥ ६॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! उन पाँच सूक्ष्म तत्त्वों का ज्ञान ही अहंकार है, इसमें संशय नहीं है और अहंकार का ज्ञान ही बुद्धि माना गया है॥6॥
 
Nareshwar! The knowledge of those five subtle elements is ego, there is no doubt about it and the knowledge of ego is considered as intelligence. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)