श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 307: विद्या-अविद्या, अक्षर और क्षर तथा प्रकृति और पुरुषके स्वरूपका एवं विवेकीके उद्‍गारका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.307.5 
विशेषाणां मनस्तेषां विद्यामाहुर्मनीषिण:।
मनस: पञ्च भूतानि विद्या इत्यभिचक्षते॥ ५॥
 
 
अनुवाद
ऋषिगण कहते हैं कि स्थूल पंचभूतों का ज्ञान मन है और मन का ज्ञान सूक्ष्म पंचभूत है ॥5॥
 
Sages say that the knowledge of the gross five elements is the mind and the knowledge of the mind is the subtle five elements. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)