श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 307: विद्या-अविद्या, अक्षर और क्षर तथा प्रकृति और पुरुषके स्वरूपका एवं विवेकीके उद्‍गारका वर्णन  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  12.307.48 
बुद्धमप्रतिबुद्धत्वाद् बुध्यमानं च तत्त्वत:।
बुध्यमानं च बुद्धं च प्राहुर्योगनिदर्शनम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
जो परमेश्वर के शाश्वत ज्ञान से युक्त है, वही बुद्ध है और जो परमेश्वर के तत्व को न जानने के कारण जिज्ञासु है, उसे 'बुद्धिमान' कहते हैं। इस प्रकार योगसिद्धान्त के अनुसार बुद्ध (शाश्वत ज्ञान से युक्त परमेश्वर) और बुध्यमान (जिज्ञासु) ये दो चेतन सत्ताएँ मानी गई हैं। 48॥
 
The one who is full of eternal knowledge of Supreme God, he is Buddha and the one who is a curious soul due to not knowing the essence of God, is called ‘intelligent’. Thus, according to the theory of Yoga, Buddha (God endowed with eternal knowledge) and Budhyaman (inquisitive being) are considered to be two conscious beings. 48॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि वसिष्ठकरालजनकसंवादे सप्ताधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३०७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें वसिष्ठकरालजनकसंवादविषयक तीन सौ सातवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३०७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)