श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 307: विद्या-अविद्या, अक्षर और क्षर तथा प्रकृति और पुरुषके स्वरूपका एवं विवेकीके उद्‍गारका वर्णन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  12.307.44 
सांख्ययोगौ मया प्रोक्तौ शास्त्रद्वयनिदर्शनात्।
यदेव शास्त्रं सांख्योक्तं योगदर्शनमेव तत्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
मैंने सांख्य और योग का जो वर्णन किया है, उसमें मैंने उन्हें दो अलग-अलग विज्ञान बताया है; परंतु वास्तव में सांख्य का विज्ञान भी योग का विज्ञान ही है (क्योंकि दोनों का फल एक ही है)।
 
In the description I have given of Sankhya and Yoga, I have described them as two separate sciences; but in reality the science of Sankhya is also the science of Yoga (because the result of both is the same).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)