vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 307: विद्या-अविद्या, अक्षर और क्षर तथा प्रकृति और पुरुषके स्वरूपका एवं विवेकीके उद्गारका वर्णन
»
श्लोक 42
श्लोक
12.307.42
अक्षरक्षरयोरेतदुक्तं तव निदर्शनम्।
मयेह ज्ञानसम्पन्नं यथाश्रुतिनिदर्शनात्॥ ४२॥
अनुवाद
हे राजन! मैंने तुम्हें यह ज्ञान सुनाया है, जो वेदों में वर्णित है, जिससे अक्षरभेद करने में सहायता मिलती है। ॥42॥
O King! I have narrated to you this knowledge, which helps one to discriminate between letters, as it has been described in the Vedas. ॥ 42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×