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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 307: विद्या-अविद्या, अक्षर और क्षर तथा प्रकृति और पुरुषके स्वरूपका एवं विवेकीके उद्गारका वर्णन
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श्लोक 42
श्लोक
12.307.42
अक्षरक्षरयोरेतदुक्तं तव निदर्शनम्।
मयेह ज्ञानसम्पन्नं यथाश्रुतिनिदर्शनात्॥ ४२॥
अनुवाद
हे राजन! मैंने तुम्हें यह ज्ञान सुनाया है, जो वेदों में वर्णित है, जिससे अक्षरभेद करने में सहायता मिलती है। ॥42॥
O King! I have narrated to you this knowledge, which helps one to discriminate between letters, as it has been described in the Vedas. ॥ 42॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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