Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.307.41: मिथिलानरेश! अव्यक्त प्रकृति, व्यक्त महातत्त्व, सगुण (जड़ वर्ग), निर्गुण (आत्मा) और सबके मूल निर्गुण परमात्मा को जानकर मनुष्य स्वयं वैसा ही हो जाता है ॥41॥ | mahabharat अध्याय 12.307: विद्या-अविद्या, अक्षर और क्षर तथा प्रकृति और पुरुषके स्वरूपका एवं विवेकीके उद्गारका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मिथिलानरेश! अव्यक्त प्रकृति, व्यक्त महातत्त्व, सगुण (जड़ वर्ग), निर्गुण (आत्मा) और सबके मूल निर्गुण परमात्मा को जानकर मनुष्य स्वयं वैसा ही हो जाता है ॥41॥
'King of Mithilana! By realizing the unmanifested nature, the manifest Mahatattvadi, the saguna (inert class), the nirguna (soul) and the original nirguna Paramatma of all, man himself becomes like that. 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥