कर्मेन्द्रियाणां सर्वेषां विद्या बुद्धीन्द्रियं स्मृतम्।
बुद्धीन्द्रियाणां च तथा विशेषा इति न: श्रुतम्॥ ४॥
अनुवाद
हमने सुना है कि समस्त कर्मेन्द्रियों का ज्ञान इन्द्रियों के समान माना गया है। अर्थात् ज्ञानेन्द्रियाँ कर्मेन्द्रियों से श्रेष्ठ हैं और ज्ञानेन्द्रियों का ज्ञान ही पाँच महाभूत हैं। 4॥
We have heard that the knowledge of all the action senses has been considered as the sense organs. That is, the senses of knowledge are superior to the senses of action and the knowledge of the senses of knowledge are the five great things. 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥