श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 307: विद्या-अविद्या, अक्षर और क्षर तथा प्रकृति और पुरुषके स्वरूपका एवं विवेकीके उद्‍गारका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.307.14 
गुणानां महदादीनामुत्पत्तिश्च परस्परम्।
अधिष्ठानात् क्षेत्रमाहुरेतत्तत् पञ्चविंशकम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
प्रकृति और पुरुष के परस्पर संयोग से ही महत्तत्त्व आदि गुण उत्पन्न होते हैं; अतः एक-दूसरे पर आश्रित होने के कारण पुरुष को भी क्षेत्र कहा गया है ॥14॥
 
Qualities like Mahatattva etc. originate from the mutual combination of Prakriti and Purusha; Therefore, because of being dependent on each other, men are also called Kshetra. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)