श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 307: विद्या-अविद्या, अक्षर और क्षर तथा प्रकृति और पुरुषके स्वरूपका एवं विवेकीके उद्‍गारका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.307.10 
विद्याविद्यार्थतत्त्वेन मयोक्ता ते विशेषत:।
अक्षरं च क्षरं चैव यदुक्तं तन्निबोध मे॥ १०॥
 
 
अनुवाद
राजन! मैंने तुम्हारे समक्ष ज्ञान सहित अज्ञान का विशेष रूप से वर्णन किया है। अब क्षर और अक्षर तत्त्व कहे गए हैं; उन्हें मुझसे सुनो।
 
Rajan! I have specifically described ignorance along with knowledge before you. Now the Kshar and Akshar elements have been said; Hear about them from me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)