Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.307.1: वशिष्ठ बोले, 'हे राजन! अब तक मैंने आपसे सांख्य दर्शन के बारे में कहा है। अब आप मुझसे क्रमशः विद्या और अविद्या के बारे में सुनिए।'   |   mahabharat अध्याय 12.307: विद्या-अविद्या, अक्षर और क्षर तथा प्रकृति और पुरुषके स्वरूपका एवं विवेकीके उद्‍गारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 307: विद्या-अविद्या, अक्षर और क्षर तथा प्रकृति और पुरुषके स्वरूपका एवं विवेकीके उद्‍गारका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.307.1 
वसिष्ठ उवाच
सांख्यदर्शनमेतावदुक्तं ते नृपसत्तम।
विद्याविद्ये त्विदानीं मे त्वं निबोधानुपूर्वश:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वशिष्ठ बोले, 'हे राजन! अब तक मैंने आपसे सांख्य दर्शन के बारे में कहा है। अब आप मुझसे क्रमशः विद्या और अविद्या के बारे में सुनिए।'
 
Vasishtha said, 'O great king! I have told you about Sankhya philosophy till now. Now listen to me in sequence about Vidya and Avidya.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)