श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.306.9 
मूत्रोत्सर्गपुरीषे च भोजने च नराधिप।
त्रिकालं नाभियुञ्जीत शेषं युञ्जीत तत्पर:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! शौच, मूत्र और भोजन - इन तीन कार्यों में लगने वाले समय के कारण योग का अभ्यास न करें। शेष समय में यत्नपूर्वक योग का अभ्यास करना चाहिए। 9॥
 
Nareshwar! Do not practice yoga because of the time it takes for these three tasks – defecation, urination and eating. In the remaining time one should practice yoga diligently. 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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