श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  12.306.7-8 
योगकृत्यं तु योगानां ध्यानमेव परं बलम्।
तच्चापि द्विविधं ध्यानमाहुर्विद्याविदो जना:॥ ७॥
एकाग्रता च मनस: प्राणायामस्तथैव च।
प्राणायामस्तु सगुणो निर्गुणो मनसस्तथा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
ध्यान योगियों का मुख्य कर्तव्य है। यही उनकी परम शक्ति है। योगविद् उस ध्यान को दो प्रकार का बताते हैं - एक मन की एकाग्रता और दूसरा प्राणायाम। प्राणायाम के भी दो प्रकार हैं - सगुण और निर्गुण। इनमें से जिस प्राणायाम में मन का सगुण से सम्बन्ध होता है, वह सगुण प्राणायाम है और जिसमें मन का निर्गुण से सम्बन्ध होता है, वह निर्गुण प्राणायाम है। 7-8॥
 
Meditation is the main duty for yogis. That is his ultimate strength. Yoga scholars describe that meditation as two types – one is concentration of the mind and the other is pranayam. Pranayam also has two types – Saguna and Nirguna. Of these, the pranayam in which the mind is in relation with Saguna is Saguna Pranayam and the one in which the mind is in relation with Nirguna is Nirguna Pranayam. 7-8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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