श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  12.306.49 
सर्वमेतद् विजानन्तो नासर्वस्य प्रबोधनात्।
व्यक्तीभूता भविष्यन्ति व्यक्तस्य वशवर्तिन:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
जो लोग केवल इस सम्पूर्ण जगत् को ही जानते हैं, क्योंकि वे इससे भिन्न परमात्मा के तत्त्व को नहीं जानते, वे अवश्य ही शरीरधारी होंगे और देह, काम, क्रोध आदि दोषों के वश में रहेंगे ॥49॥
 
Those who know only this whole world, because they do not know the essence of God other than this, they will definitely have a body and will remain under the influence of body, lust, anger etc. defects. 49॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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