Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.306.38: वह अव्यक्त क्षेत्र (प्रकृति) को जानता है, इसलिए उसे क्षेत्रज्ञ कहते हैं और प्राकृत शरीर के रोमछिद्रों में अन्तरंग रूप से शयन करने के कारण उसे 'पुरुष' कहते हैं ॥38॥ | mahabharat अध्याय 12.306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह अव्यक्त क्षेत्र (प्रकृति) को जानता है, इसलिए उसे क्षेत्रज्ञ कहते हैं और प्राकृत शरीर के रोमछिद्रों में अन्तरंग रूप से शयन करने के कारण उसे 'पुरुष' कहते हैं ॥38॥
He knows the unmanifested area (nature), hence he is called Kshetragya and because of sleeping internally in the pores of the Prakrit body, he is called 'Purusha'. 38॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥