Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.306.32: जैसे समुद्र से उठने वाली लहरें उसी समुद्र में शान्त हो जाती हैं, वैसे ही समस्त गुण (तत्त्व) सदैव प्रत्यक्ष क्रम से उत्पन्न होते हैं और विपरीत क्रम से अपने कारण गुणों (तत्त्वों) में लीन हो जाते हैं।॥ 32॥   |   mahabharat अध्याय 12.306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.306.32 
अनुलोमेन जायन्ते लीयन्ते प्रतिलोमत:।
गुणा गुणेषु सततं सागरस्योर्मयो यथा॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
जैसे समुद्र से उठने वाली लहरें उसी समुद्र में शान्त हो जाती हैं, वैसे ही समस्त गुण (तत्त्व) सदैव प्रत्यक्ष क्रम से उत्पन्न होते हैं और विपरीत क्रम से अपने कारण गुणों (तत्त्वों) में लीन हो जाते हैं।॥ 32॥
 
Just as the waves rising from the ocean calm down in the same ocean, similarly all the qualities (elements) always arise in the direct order and in the reverse order get absorbed in their causal qualities (elements).॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)