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mahabharat 12.306.27: श्रेष्ठ! प्रकृतिवादी विद्वान मूल प्रकृति को अव्यक्त कहते हैं। इसी से एक और तत्त्व उत्पन्न हुआ, जिसे महातत्त्व कहते हैं ॥27॥   |   mahabharat अध्याय 12.306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.306.27 
अव्यक्तमाहु: प्रकृतिं परां प्रकृतिवादिन:।
तस्मान्महत् समुत्पन्नं द्वितीयं राजसत्तम॥ २७॥
 
 
अनुवाद
श्रेष्ठ! प्रकृतिवादी विद्वान मूल प्रकृति को अव्यक्त कहते हैं। इसी से एक और तत्त्व उत्पन्न हुआ, जिसे महातत्त्व कहते हैं ॥27॥
 
The best! Naturalist scholars call the original nature latent. From this another element emerged, which is called Mahatattva. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)