Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.306.26: यहाँ तक मैंने तुम्हें योग दर्शन का वास्तविक सार समझाया है। अब मैं सांख्य दर्शन का वर्णन करूँगा; यह विचारों पर आधारित दर्शन है। 26.   |   mahabharat अध्याय 12.306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.306.26 
योगदर्शनमेतावदुक्तं ते तत्त्वतो मया।
सांख्यज्ञानं प्रवक्ष्यामि परिसंख्यानदर्शनम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
यहाँ तक मैंने तुम्हें योग दर्शन का वास्तविक सार समझाया है। अब मैं सांख्य दर्शन का वर्णन करूँगा; यह विचारों पर आधारित दर्शन है। 26.
 
Up to this point I have explained to you the true essence of Yoga philosophy. Now I will describe Sankhya; this is a philosophy based on thoughts. 26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)