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mahabharat 12.306.22: वह ब्रह्म सूक्ष्म से भी सूक्ष्म और महान से भी महान कहा गया है। वह सब प्राणियों के भीतर अंतर्यामी रूप से अवश्य निवास करता है, परन्तु किसी को दिखाई नहीं देता। ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 12.306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.306.22 
तदेवाहुरणुभ्योऽणु तन्महद्‍भ्यो महत्तरम्।
तत् तत्त्वं सर्वभूतेषु ध्रुवं तिष्ठन् न दृश्यते॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वह ब्रह्म सूक्ष्म से भी सूक्ष्म और महान से भी महान कहा गया है। वह सब प्राणियों के भीतर अंतर्यामी रूप से अवश्य निवास करता है, परन्तु किसी को दिखाई नहीं देता। ॥22॥
 
That Brahma is said to be smaller than the smallest and greater than the greatest. He certainly resides within all living beings as the inner controller, but is not visible to anyone. ॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)