Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.306.21: जो धैर्यवान, बुद्धिमान, ब्रह्मबोधक शास्त्रों में श्रद्धा रखने वाले और महात्मा ब्राह्मण हैं, वे ही ब्रह्म के उस अजन्मा और अविनाशी स्वरूप को देख पाते हैं ॥21॥ | mahabharat अध्याय 12.306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये पश्यन्ति महात्मानो धृतिमन्तो मनीषिण:।
ब्राह्मणा ब्रह्मयोनिस्था ह्ययोनिममृतात्मकम्॥ २१॥
अनुवाद
जो धैर्यवान, बुद्धिमान, ब्रह्मबोधक शास्त्रों में श्रद्धा रखने वाले और महात्मा ब्राह्मण हैं, वे ही ब्रह्म के उस अजन्मा और अविनाशी स्वरूप को देख पाते हैं ॥21॥
Only those who are patient, wise, have faith in Brahmabodhaka scriptures and Mahatma Brahmins are able to see that unborn and immortal form of Brahma. 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥