Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.306.20: ध्यानस्थ योगी अपने हृदय में भगवान् को उसी प्रकार प्रत्यक्ष देखता है, जैसे धूमरहित अग्नि, किरणों से प्रकाशित सूर्य और आकाश में विद्युत् का प्रकाश देखा जाता है ॥20॥   |   mahabharat अध्याय 12.306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.306.20 
विधूम इव सप्तार्चिरादित्य इव रश्मिमान्।
वैद्युतोऽग्निरिवाकाशे दृश्यतेऽऽत्मा तथाऽऽत्मनि॥ २०॥
 
 
अनुवाद
ध्यानस्थ योगी अपने हृदय में भगवान् को उसी प्रकार प्रत्यक्ष देखता है, जैसे धूमरहित अग्नि, किरणों से प्रकाशित सूर्य और आकाश में विद्युत् का प्रकाश देखा जाता है ॥20॥
 
A meditative yogi sees God directly in his heart in the same way as a smokeless fire, the sun illuminated with rays and the light of electricity in the sky are seen. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)