Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.305.36: मैंने तुम्हें क्षर और अक्षर का स्वरूप बताने वाला यह दर्शन समझाया है। क्षर और अक्षर में क्या अंतर है? इसे इस प्रकार समझो - जो परमात्मा सदैव एक रूप में रहता है, उसे अक्षर कहते हैं और यह जो संसार अनेक रूपों में प्रकट होता है, उसे क्षर कहते हैं। 36. | mahabharat अध्याय 12.305: क्षर-अक्षर एवं प्रकृति-पुरुषके विषयमें राजा जनककी शंका और उसका वसिष्ठजीद्वारा उत्तर । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैंने तुम्हें क्षर और अक्षर का स्वरूप बताने वाला यह दर्शन समझाया है। क्षर और अक्षर में क्या अंतर है? इसे इस प्रकार समझो - जो परमात्मा सदैव एक रूप में रहता है, उसे अक्षर कहते हैं और यह जो संसार अनेक रूपों में प्रकट होता है, उसे क्षर कहते हैं। 36.
I have explained to you this philosophy which explains the nature of kshar and akshar. What is the difference between kshar and akshar? Understand it this way – the Supreme Being who is always in one form is called akshar and this natural world which appears in various forms is called kshar. 36.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥