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mahabharat 12.305.22: परंतु परमात्मा इन्द्रिय, बीज, द्रव्य और शरीर से रहित है और निर्गुण है; अतः उसमें गुण कैसे हो सकते हैं? ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 12.305: क्षर-अक्षर एवं प्रकृति-पुरुषके विषयमें राजा जनककी शंका और उसका वसिष्ठजीद्वारा उत्तर   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.305.22 
निरिन्द्रियस्याबीजस्य निर्द्रव्यस्याप्यदेहिन:।
कथं गुणा भविष्यन्ति निर्गुणत्वान्महात्मन:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
परंतु परमात्मा इन्द्रिय, बीज, द्रव्य और शरीर से रहित है और निर्गुण है; अतः उसमें गुण कैसे हो सकते हैं? ॥22॥
 
But the Supreme Being is devoid of senses, seed, substance and body and is without attributes; hence how can He have attributes? ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)