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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 305: क्षर-अक्षर एवं प्रकृति-पुरुषके विषयमें राजा जनककी शंका और उसका वसिष्ठजीद्वारा उत्तर
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श्लोक 21
श्लोक
12.305.21
द्रव्याद् द्रव्यस्य निर्वृत्तिरिन्द्रियादिन्द्रियं तथा।
देहाद् देहमवाप्नोति बीजाद् बीजं तथैव च॥ २१॥
अनुवाद
जैसे बीज से बीज उत्पन्न होता है, वैसे ही पदार्थ से पदार्थ, इन्द्रिय से इन्द्रिय और शरीर से शरीर उत्पन्न होता है ॥21॥
Just as a seed is born from a seed, similarly a substance is born from a substance, a sense is born from a sense and a body is born from a body. ॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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