श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 305: क्षर-अक्षर एवं प्रकृति-पुरुषके विषयमें राजा जनककी शंका और उसका वसिष्ठजीद्वारा उत्तर  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.305.19 
यदेव योगा: पश्यन्ति सांख्यैस्तदनुगम्यते।
एकं सांख्यं च योगं च य: पश्यति स बुद्धिमान्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
योगी जिस तत्व को जान लेते हैं, सांख्यवेत्ता विद्वान् भी उसी ज्ञान को प्राप्त कर लेते हैं। जो व्यावहारिक दृष्टि से सांख्य और योग को एक ही समझता है, वही बुद्धिमान है। 19॥
 
The essence which the Yogi realizes; Sankhyavetta scholars also acquire the same knowledge. The one who considers Sankhya and Yoga as one from the practical point of view is wise. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)