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mahabharat 12.305.16: जो अपनी मंद बुद्धि के कारण विद्वानों की सभा में किसी ग्रन्थ का अर्थ नहीं समझा सकता, वह उसका तात्पर्य निश्चयपूर्वक कैसे बता सकता है?॥16॥   |   mahabharat अध्याय 12.305: क्षर-अक्षर एवं प्रकृति-पुरुषके विषयमें राजा जनककी शंका और उसका वसिष्ठजीद्वारा उत्तर   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.305.16 
न य: संसत्सु कथयेद् ग्रन्थार्थं स्थूलबुद्धिमान्।
स कथं मन्दविज्ञानो ग्रन्थं वक्ष्यति निर्णयात्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जो अपनी मंद बुद्धि के कारण विद्वानों की सभा में किसी ग्रन्थ का अर्थ नहीं समझा सकता, वह उसका तात्पर्य निश्चयपूर्वक कैसे बता सकता है?॥16॥
 
One who, because of his dull and slow intellect, cannot explain the meaning of a text in the assembly of learned people, how can he state its purport with certainty?॥16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)