Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.305.14: जो मनुष्य किसी ग्रन्थ का अर्थ नहीं समझता, वह उसे रटकर केवल उसका बोझ ढोता है; परन्तु जो उसके अर्थ का सार समझता है, उसके लिए ग्रन्थ का अध्ययन करना व्यर्थ नहीं है ॥14॥ | mahabharat अध्याय 12.305: क्षर-अक्षर एवं प्रकृति-पुरुषके विषयमें राजा जनककी शंका और उसका वसिष्ठजीद्वारा उत्तर । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भारं स वहते तस्य ग्रन्थस्यार्थं न वेत्ति य:।
यस्तु ग्रन्थार्थतत्त्वज्ञो नास्य ग्रन्थागमो वृथा॥ १४॥
अनुवाद
जो मनुष्य किसी ग्रन्थ का अर्थ नहीं समझता, वह उसे रटकर केवल उसका बोझ ढोता है; परन्तु जो उसके अर्थ का सार समझता है, उसके लिए ग्रन्थ का अध्ययन करना व्यर्थ नहीं है ॥14॥
One who does not understand the meaning of a text, merely carries the burden of the text by rote learning it; but for one who understands the essence of its meaning, studying the text is not futile. ॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥