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mahabharat 12.305.1: राजा जनक बोले - प्रभु ! क्षर और अक्षर (प्रकृति और पुरुष) का यह सम्बन्ध स्त्री-पुरुष के वैवाहिक सम्बन्ध के समान ही माना गया है ॥1॥   |   mahabharat अध्याय 12.305: क्षर-अक्षर एवं प्रकृति-पुरुषके विषयमें राजा जनककी शंका और उसका वसिष्ठजीद्वारा उत्तर   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.305.1 
जनक उवाच
अक्षरक्षरयोरेष द्वयो: सम्बन्ध इष्यते।
स्त्रीपुंसोर्वापि भगवन् सम्बन्धस्तद्वदुच्यते॥ १॥
 
 
अनुवाद
राजा जनक बोले - प्रभु ! क्षर और अक्षर (प्रकृति और पुरुष) का यह सम्बन्ध स्त्री-पुरुष के वैवाहिक सम्बन्ध के समान ही माना गया है ॥1॥
 
King Janak said – Lord! This relationship between Kshar and Akshar (nature and man) is considered to be the same as the marital relationship between man and woman. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)