श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 303: प्रकृति-संसर्गके कारण जीवका अपनेको नाना प्रकारके कर्मोंका कर्ता और भोक्ता मानना एवं नाना योनियोंमें बारंबार जन्म ग्रहण करना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  12.303.41 
निरयाच्चापि मानुष्यं कालेनैष्याम्यहं पुन:।
मनुष्यत्वाच्च देवत्वं देवत्वात् पौरुषं पुन:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
दीर्घकाल के पश्चात् नरक से मुक्त होकर मैं पुनः मनुष्य लोक में जन्म लूँगा। मनुष्य लोक से मैं अपने पुण्य कर्मों के फलस्वरूप दिव्य लोक में जाऊँगा और वहाँ से जब मेरे पुण्य क्षीण हो जाएँगे, तब पुनः मनुष्य शरीर में जन्म लूँगा।॥ 41॥
 
After being freed from hell after a long period of time, I will be born again in the human world. From the human world, as a result of my good deeds, I will go to the divine world and from there, when my good deeds get exhausted, I will be born again in a human body.॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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