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mahabharat 12.303.40: यदि मैं इस जन्म में बुरे कर्म करूँगा, तो मुझे यहाँ भी असीम दुःख भोगना पड़ेगा। यह मनुष्य जन्म अपार दुःखों से भरा है। इसके अतिरिक्त, मुझे अपने पापों के फलस्वरूप नरक में भी डूबना पड़ेगा ॥40॥   |   mahabharat अध्याय 12.303: प्रकृति-संसर्गके कारण जीवका अपनेको नाना प्रकारके कर्मोंका कर्ता और भोक्ता मानना एवं नाना योनियोंमें बारंबार जन्म ग्रहण करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 303: प्रकृति-संसर्गके कारण जीवका अपनेको नाना प्रकारके कर्मोंका कर्ता और भोक्ता मानना एवं नाना योनियोंमें बारंबार जन्म ग्रहण करना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  12.303.40 
भविष्यति च मे दु:खं कृतेनेहाप्यनन्तकम्।
महद् दु:खं हि मानुष्यं निरये चापि मज्जनम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
यदि मैं इस जन्म में बुरे कर्म करूँगा, तो मुझे यहाँ भी असीम दुःख भोगना पड़ेगा। यह मनुष्य जन्म अपार दुःखों से भरा है। इसके अतिरिक्त, मुझे अपने पापों के फलस्वरूप नरक में भी डूबना पड़ेगा ॥40॥
 
If I commit bad deeds in this life, I will have to suffer infinite pain here too. This human birth is full of immense pain. Apart from this, I will have to sink in hell as a result of my sins. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)