Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.303.39: अब मुझे केवल पुण्य के अनुष्ठान करने चाहिए जो सुख के साधन हैं। यदि मैं उन्हें एक बार भी कर लूँ तो मुझे जीवन भर सुख मिलेगा और आगे भी प्रत्येक जन्म में सुख मिलता रहेगा॥ 39॥ | mahabharat अध्याय 12.303: प्रकृति-संसर्गके कारण जीवका अपनेको नाना प्रकारके कर्मोंका कर्ता और भोक्ता मानना एवं नाना योनियोंमें बारंबार जन्म ग्रहण करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुखमेव तु कर्तव्यं सकृत् कृत्वा सुखं मम।
यावदन्तं च मे सौख्यं जात्यां जात्यां भविष्यति॥ ३९॥
अनुवाद
अब मुझे केवल पुण्य के अनुष्ठान करने चाहिए जो सुख के साधन हैं। यदि मैं उन्हें एक बार भी कर लूँ तो मुझे जीवन भर सुख मिलेगा और आगे भी प्रत्येक जन्म में सुख मिलता रहेगा॥ 39॥
Now I must perform only the rituals of virtue which are the means of happiness. If I perform them even once, I will get happiness throughout my life and in future also I will keep on getting happiness in every birth.॥ 39॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥