Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.303.26: वह कभी व्यापार करता है, कभी ब्राह्मण और क्षत्रियों के कर्तव्य करता है और कभी वैश्य और शूद्रों के कर्मों का आश्रय लेता है। वह गरीबों और अंधे लोगों को नाना प्रकार का दान देता है॥ 26॥ | mahabharat अध्याय 12.303: प्रकृति-संसर्गके कारण जीवका अपनेको नाना प्रकारके कर्मोंका कर्ता और भोक्ता मानना एवं नाना योनियोंमें बारंबार जन्म ग्रहण करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वणिक्पथं द्विजं क्षत्रं वैश्यशूद्रांस्तथैव च।
दानं च विविधाकारं दीनान्धकृपणादिषु॥ २६॥
अनुवाद
वह कभी व्यापार करता है, कभी ब्राह्मण और क्षत्रियों के कर्तव्य करता है और कभी वैश्य और शूद्रों के कर्मों का आश्रय लेता है। वह गरीबों और अंधे लोगों को नाना प्रकार का दान देता है॥ 26॥
Sometimes he does business, sometimes he performs the duties of Brahmins and Kshatriyas and sometimes he takes recourse to the deeds of Vaishyas and Shudras. He gives various kinds of donations to the poor and the blind.॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥