Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.302.8: एक समय की बात है, ऋषियों में सूर्य के समान तेजस्वी महर्षि वशिष्ठ अपने आश्रम में विराजमान थे। राजा जनक वहाँ पहुँचे और उनसे परम कल्याणकारी ज्ञान के विषय में पूछा। | mahabharat अध्याय 12.302: वसिष्ठ और करालजनकका संवाद—क्षर और अक्षरतत्त्वका निरूपण और इनके ज्ञानसे मुक्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वसिष्ठं श्रेष्ठमासीनमृषीणां भास्करद्युतिम्।
पप्रच्छ जनको राजा ज्ञानं नै:श्रेयसं परम्॥ ८॥
अनुवाद
एक समय की बात है, ऋषियों में सूर्य के समान तेजस्वी महर्षि वशिष्ठ अपने आश्रम में विराजमान थे। राजा जनक वहाँ पहुँचे और उनसे परम कल्याणकारी ज्ञान के विषय में पूछा।
Once upon a time, the great sage Vasishtha, who was as radiant as the Sun among the sages, was sitting in his hermitage. King Janaka reached there and asked him about the knowledge that brings ultimate welfare.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥