Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.302.42: इस प्रकार सृष्टि और संहार के तत्त्व को जाननेवाला यह महान् आत्मा अविनाशी होते हुए भी प्रकृति के संसर्ग से भ्रष्ट हो जाता है और प्रकृति-बुद्धि से रहित होते हुए भी शरीर में स्वत्वधारी हो जाता है ॥42॥   |   mahabharat अध्याय 12.302: वसिष्ठ और करालजनकका संवाद—क्षर और अक्षरतत्त्वका निरूपण और इनके ज्ञानसे मुक्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 302: वसिष्ठ और करालजनकका संवाद—क्षर और अक्षरतत्त्वका निरूपण और इनके ज्ञानसे मुक्ति  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.302.42 
एवमेष महानात्मा सर्गप्रलयकोविद:।
विकुर्वाण: प्रकृतिमानभिमन्यत्यबुद्धिमान्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सृष्टि और संहार के तत्त्व को जाननेवाला यह महान् आत्मा अविनाशी होते हुए भी प्रकृति के संसर्ग से भ्रष्ट हो जाता है और प्रकृति-बुद्धि से रहित होते हुए भी शरीर में स्वत्वधारी हो जाता है ॥42॥
 
In this way, this great soul, which knows the principles of creation and destruction, despite being imperishable, becomes corrupt due to contact with nature and despite being devoid of nature-intelligence, it becomes self-respecting in the body. 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)