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mahabharat 12.302.39: महत्तत्त्व आदि व्यक्त पदार्थों से उत्पन्न होने वाले जो नश्वर पदार्थ हैं, वे किसी न किसी आकार के आश्रय में स्थित हैं। गणना करने पर चौबीसवाँ तत्त्व अव्यक्त प्रकृति है और पच्चीसवाँ निराकार ईश्वर है ॥39॥   |   mahabharat अध्याय 12.302: वसिष्ठ और करालजनकका संवाद—क्षर और अक्षरतत्त्वका निरूपण और इनके ज्ञानसे मुक्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 302: वसिष्ठ और करालजनकका संवाद—क्षर और अक्षरतत्त्वका निरूपण और इनके ज्ञानसे मुक्ति  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  12.302.39 
यन्मर्त्यमसृजद् व्यक्तं तत्तन्मूर्त्यधितिष्ठति।
चतुर्विंशतिमोऽव्यक्तो ह्यमूर्त: पञ्चविंशक:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
महत्तत्त्व आदि व्यक्त पदार्थों से उत्पन्न होने वाले जो नश्वर पदार्थ हैं, वे किसी न किसी आकार के आश्रय में स्थित हैं। गणना करने पर चौबीसवाँ तत्त्व अव्यक्त प्रकृति है और पच्चीसवाँ निराकार ईश्वर है ॥39॥
 
The mortal substances which are created by the manifest substances like Mahatattva etc., are situated under the support of some shape or the other. On calculation, the twenty-fourth element is the latent nature and the twenty-fifth is the formless God. 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)