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mahabharat 12.302.34: पृथ्वी, जल और आकाश ही देहधारी प्राणियों के निवास स्थान हैं, अन्यत्र कहीं नहीं; ऐसा विद्वानों का मत है। ऐसा मैंने सुना है।   |   mahabharat अध्याय 12.302: वसिष्ठ और करालजनकका संवाद—क्षर और अक्षरतत्त्वका निरूपण और इनके ज्ञानसे मुक्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.302.34 
जले भुवि तथाऽऽकाशे नान्यत्रेति विनिश्चय:।
स्थानं देहवतामासीदित्येवमनुशुश्रुम॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी, जल और आकाश ही देहधारी प्राणियों के निवास स्थान हैं, अन्यत्र कहीं नहीं; ऐसा विद्वानों का मत है। ऐसा मैंने सुना है।
 
Earth, water and sky are the only places where embodied beings reside, and nowhere else; this is the opinion of learned people. I have heard this. 34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)