Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.302.30-33: नरश्रेष्ठ! इन तत्त्वों के समुदाय को तीनों लोकों में समस्त देहधारियों का शरीर समझना चाहिए। देवता, मनुष्य, राक्षस, यक्ष, भूत, गंधर्व किन्नर, महासर्प, भाट, पिशाच, देवर्षि, निशाचर प्राणी, दंश (डंक मारने वाली मक्खियाँ), कीड़े, मच्छर, दुर्गन्धयुक्त कीड़े, चूहे, कुत्ते, चाण्डाल, मृग, श्वपाक (कुत्ते खाने वाले), पुलक (म्लेच्छ), हाथी, घोड़े, गधे, सिंह, वृक्ष और गौ आदि जो भी मूर्तियाँ हैं, वे सब द्रव्य हैं, ये तत्त्व सर्वत्र दिखाई देते हैं। 30—33॥ | mahabharat अध्याय 12.302: वसिष्ठ और करालजनकका संवाद—क्षर और अक्षरतत्त्वका निरूपण और इनके ज्ञानसे मुक्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नरश्रेष्ठ! इन तत्त्वों के समुदाय को तीनों लोकों में समस्त देहधारियों का शरीर समझना चाहिए। देवता, मनुष्य, राक्षस, यक्ष, भूत, गंधर्व किन्नर, महासर्प, भाट, पिशाच, देवर्षि, निशाचर प्राणी, दंश (डंक मारने वाली मक्खियाँ), कीड़े, मच्छर, दुर्गन्धयुक्त कीड़े, चूहे, कुत्ते, चाण्डाल, मृग, श्वपाक (कुत्ते खाने वाले), पुलक (म्लेच्छ), हाथी, घोड़े, गधे, सिंह, वृक्ष और गौ आदि जो भी मूर्तियाँ हैं, वे सब द्रव्य हैं, ये तत्त्व सर्वत्र दिखाई देते हैं। 30—33॥
Narashrestha! The community of these elements should be considered as the body of all the embodied beings in the three worlds. Whatever idols are there in the form of gods, humans, demons, yakshas, ghosts, Gandharva kinnars, great serpents, bards, vampires, devarshis, nocturnal beings, danshas (stinging flies), insects, mosquitoes, foul-smelling insects, rats, dogs, chandalas, deers, shvapaks (dog-eaters), pulkas (mlecchas), elephants, horses, donkeys, lions, trees and cows etc. It is matter, these elements are seen everywhere. 30—33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥