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mahabharat 12.302.23: अविधि (ज्ञान) और विधि (कर्म) भी उसी परमात्मा से उत्पन्न हुए हैं। श्रुति और शास्त्र का अर्थ समझने वाले विद्वानों ने इन्हें विद्या और अविद्या कहा है। 23॥   |   mahabharat अध्याय 12.302: वसिष्ठ और करालजनकका संवाद—क्षर और अक्षरतत्त्वका निरूपण और इनके ज्ञानसे मुक्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 302: वसिष्ठ और करालजनकका संवाद—क्षर और अक्षरतत्त्वका निरूपण और इनके ज्ञानसे मुक्ति  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.302.23 
अविधिश्च विधिश्चैव समुत्पन्नौ तथैकत:।
विद्याविद्येति विख्याते श्रुतिशास्त्रार्थचिन्तकै:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
अविधि (ज्ञान) और विधि (कर्म) भी उसी परमात्मा से उत्पन्न हुए हैं। श्रुति और शास्त्र का अर्थ समझने वाले विद्वानों ने इन्हें विद्या और अविद्या कहा है। 23॥
 
Avidhi (knowledge) and Vidhi (karma) also originated from that Supreme Being. Scholars who consider the meaning of Shruti and Shastra have called them Vidya and Avidya. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)